➤ पाषाणकाल ( Paleolithic Age)

Palaeolithic period Palaeolithic पुरापाषाण काल पुरापाषाणPalaeolithic period Palaeolithic पुरापाषाण काल पुरापाषाण

पाषाणकाल को तीन भागों में बाँटा गया है 1️⃣ पुरापाषाण काल 2️⃣ मध्यपाषाण काल 3️⃣ नवपाषाण मानव की उत्पत्ति से 10,000 ई.पू. लगभग 10,000 ई.पू. से 8,000 ई.पू. तक लगभग 8,000 ई.पू. से 3,000 ई.पू. तक
पुरापाषाण काल पुरापाषाण काल को तीन भागों में बाँटा गया है 1️⃣ पूर्व-पुरापाषाण काल 2️⃣ मध्य-पुरापाषाण काल 3️⃣ उत्तर-पुरापाषाण काल
लगभग 50 लाख वर्ष पूर्व तक लगभग 50 हजार वर्ष पूर्व से 40 हजार वर्ष पूर्व तक लगभग 40 हजार वर्ष पूर्व से 10 हजार वर्ष पूर्व तक

यह वर्गीकरण पत्थर के औज़ारों के स्वरूप तथा जलवायु में होने वाले परिवर्तनों के आधार पर किया गया है।
1️⃣पूर्व-पुरापाषाण काल ( मानव की उत्पत्ति से लगभग 50 हजार ई.पू. तक।) ➡️मानव की उत्पत्ति से लगभग 50 हजार ई.पू. तक।
➡️ मनुष्य शिकारी व खाद्य संग्राहक था।
➡️केवल बड़े जानवरों का शिकार करता था।
➡️कृषि तथा पशुपालन का ज्ञान नहीं था।
➡️शिकार के लिए अपरिष्कृत पत्थर के औज़ारों का प्रयोग करता था।
उपकरण
पेबल
चॉपर (गोलाश्म)
चॉपिंग टूल ➡️ पूर्व-पुरापाषाण संस्कृति को दो भागों में बाँटा जाता है —
(क) चॉपर-चॉपिंग संस्कृति (ख) हैंडऐक्स संस्कृति (अशूलियन संस्कृति)
➡️ 1863 में रॉबर्ट ब्रूस फूट ने मद्रास के निकट पल्लावरम से हैंडऐक्स खोजे।
➡️ 1864 में ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने इसे अशूलियन संस्कृति कहा।
➡️ 1928 में डी. टेरा वाडिया ने सोहन घाटी को इस संस्कृति के उपकरण स्थल बताया।
➡️ प्रमुख स्थल — नर्मदा घाटी (हथनौरा), 2️⃣ मध्य-पुरापाषाण काल (50,000 – 40,000 ई.पू.)
➡️ इस काल में मानव शिकारी व खाद्य संग्राहक था।
➡️ क्वार्ट्जाइट पत्थरों के साथ जैस्पर, चर्ट, फ्लिंट आदि के औज़ार बनने लगे।
उपकरण
चॉपर
चॉपिंग टूल
स्क्रैपर
फ्लेक
ब्लेड
इसे फ्लेक संस्कृति भी कहा जाता है।

3️⃣ उत्तर-पुरापाषाण काल(40,000 से 10,000 ई.पू.) ➡️ मनुष्य शिकारी व खाद्य संग्राहक ही था।
➡️ इस काल में ब्लेड उपकरणों (फ्लेक) का प्रयोग होने लगा।
➡️ मछली पकड़ने तथा शिकार करने की कला का विकास हुआ।
➡️ आधुनिक मानव (होमो सेपियंस) का उद्भव इसी काल में हुआ।
अगर चाहो तो मैं पूरे पाषाणकाल के नोट्स एक ही जगह साफ-सुथरे फॉर्मेट में बना दूँ

मध्यपाषाण काल(लगभग 10,000 ई.पू. से 8,000 ई.पू.) → मध्यपाषाण कालीन प्रथम स्थल एवं औज़ारों की खोज 1867 में श्री डी. कार्लाइल द्वारा की गई।
→ इस काल में मानव शिकारी, खाद्य-संग्रहकर्ता तथा पशुपालक था।
→ इस काल में पत्थरों के अलावा हड्डियों के औज़ार भी बनाए जाने लगे।
→ इस काल को माइक्रोलिथिक काल कहा जाता है क्योंकि उपकरण छोटे पत्थरों से बने होते थे।
→ पक्षी तथा मध्यम आकार के जीवों का शिकार किया जाने लगा।
→ शिकार-नवचंद्राकार, समलम्ब एवं औज़ारों का प्रयोग होने लगा।
→ प्रमुख स्थल: आदमगढ़ (होशंगाबाद), बागोर (राजस्थान) इस काल में पशुपालन के प्रमाण प्राप्त होते हैं।
→ प्रथम पालतू पशु कुत्ता था।
→ सरायनाहर राय, महादहा, दमदमा (उ.प्र.) महत्वपूर्ण स्थल हैं।
→ बागोर (राजस्थान) में हड्डियों से बने उपकरण मिले हैं। (मध्यपाषाण काल)
→ सागर झील (बिहार) से मत्स्याखेट (मछली पकड़ने) के प्रमाण मिले हैं।
→ भीमबेटका के अधिकांश चित्र मध्यपाषाण काल के हैं।
नवपाषाण काल(लगभग 8,000 ई.पू. से 4,000 ई.पू.) → नवपाषाण काल शब्द का प्रयोग 1865 में लुबॉक ने किया।
→ टोंस नदी घाटी (उ.प्र.) नवपाषाण काल का प्रमुख स्थल है।
→ औज़ारों की खोज 1860 में ला मासुरिये ने कीनवपाषाण काल की विशेषताएँ
→ स्थायी जीवन की शुरुआत हुई।
→ खेती, पशुपालन और मिट्टी के बर्तन बनने लगे।
→ पत्थर के औज़ार घिसकर बनाए जाने लगे।
→ कृषि के प्रारंभिक साक्ष्य मेहरगढ़ (पाकिस्तान) से मिले हैं।
→ कश्मीर के बुर्जहोम तथा गुफ्कराल से नवपाषाण जीवन के प्रमाण मिले हैं।
→ बेलन घाटी के कोल्डीहवा (उ.प्र.) से चावल के सबसे पुराने प्रमाण मिले हैं।
→ पुरापाषाण काल — (Palaeolithic Period)
→ पूर्व पुरापाषाण काल — Lower Palaeolithic
→ मध्य पुरापाषाण काल — Middle Palaeolithic
→ उच्च पुरापाषाण काल — Upper Palaeolithic → मध्यपाषाण काल — Mesolithic Period
→ नवपाषाण काल — Neolithic Period
→ ताम्रपाषाण काल — Chalcolithic

[ ताम्रपाषाण काल (Chalcolithic Period)
→ इस काल में मानव ने पत्थर के साथ-साथ ताँबे के औज़ारों का भी उपयोग करना शुरू किया।
→ यह काल लगभग 2100 ईसा पूर्व से 500 ईसा पूर्व तक माना जाता है।
→ ताम्रपाषाण संस्कृतियाँ कृषि आधारित थीं।
प्रमुख ताम्रपाषाण संस्कृतियाँ —
आहड़ संस्कृति (राजस्थान) → गिलुंड
कायथा संस्कृति (मध्य प्रदेश) → कायथा
मालवा संस्कृति (मध्य प्रदेश) → नवदाटोली (नर्मदा घाटी)
जोरवे संस्कृति (महाराष्ट्र) → इनामगांव

i) आहड़ संस्कृति (राजस्थान)
→ इसे बनास संस्कृति भी कहा जाता है।
→ स्थल — आहड़ (उदयपुर), गिलुंड
→ यह एक ताम्रपाषाण संस्कृति थी।
ii) कायथा संस्कृति (मध्य प्रदेश)
→ स्थल — कायथा (उज्जैन), एरण (सागर)
→ यहाँ से मृद्भांड, हड्डी, ताँबे के औज़ार मिले हैं।
→ खोजकर्ता — बी. एस. वाकणकर
iii) मालवा संस्कृति (मध्य प्रदेश)
→ स्थल — एरण, कायथा, मालवा क्षेत्र
→ प्रमुख स्थल — नवदाटोली (नर्मदा घाटी)
→ यहाँ से उत्कृष्ट मृद्भांड प्राप्त हुए हैं।
iv) जोरवे संस्कृति (महाराष्ट्र)
→ स्थल — जोरवे, नवासे, देशगांव, इनामगांव