सिंधु घाटी सभ्यता
क्या आप जानते हैं कि दुनिया की सबसे पहली योजनाबद्ध सभ्यताओं में से एक भारत में विकसित हुई थी?
Indus Valley Civilization, जिसे हिंदी में सिंधु घाटी सभ्यता कहा जाता है, लगभग 2600 ईसा पूर्व विकसित हुई और अपनी उन्नत नगर व्यवस्था, स्वच्छता प्रणाली और व्यापारिक संरचना के लिए प्रसिद्ध रही।
- सिंधु सभ्यता का इतिहास
- प्रमुख नगर
- जीवनशैली
- अर्थव्यवस्था
- धर्म और कला
- पतन के कारण

- सिंधु सभ्यता का इतिहास
काल निर्धारण
कार्बन डेटिंग विधि (C-14) के अनुसार — 2350 ई.पू. से 1750 ई.पू.
हड़प्पा सभ्यता
स्थान: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में मोंटगोमरी (वर्तमान साहीवाल) ज़िला
खोज: 1921 ई. — दयाराम साहनी
स्थिति: रावी नदी के तट पर
विशेषता: स्टुअर्ट पिगॉट ने हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो को जुड़वाँ सभ्यताएँ कहा है।
प्रकृति: हड़प्पा एक उन्नत औद्योगिक नगर था।
उद्योग: ऊन, सूती वस्त्र तथा मिट्टी के बर्तन बनाने का उद्योग प्रसिद्ध था।
महत्त्व: पाकिस्तान का राष्ट्रीय राजमार्ग (N-5) हड़प्पा से होकर गुजरता है
नामकरण
हड़प्पा सभ्यता → प्रथम खोज स्थल हड़प्पा के नाम पर
सिंधु घाटी सभ्यता → सिंधु नदी के तट पर विकसित
सरस्वती घाटी सभ्यता → बाद में सिंधु घाटी सभ्यता के नाम से प्रसिद्ध
कांस्य युगीन सभ्यता → तांबा + टिन = कांस्य
प्रथम नगरीय सभ्यता
सिंधु घाटी सभ्यता का भौगोलिक विस्तार
सिंधु घाटी सभ्यता का आकार त्रिभुजाकार था और इसका विस्तार लगभग 12,99,600 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ था।
सीमाएँ
उत्तर — माण्डा (जम्मू-कश्मीर)
दक्षिण — दायमाबाद (महाराष्ट्र)
पूर्व — आलमगीरपुर (उत्तर प्रदेश)
पश्चिम — सुत्कागेण्डोर (बलूचिस्तान, पाकिस्तान)
प्रमुख स्थल
हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, कालीबंगा, लोथल, धोलावीरा, बनावली, राखीगढ़ी आदि।
हड़प्पा सभ्यता
स्थान: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में मोंटगोमरी (वर्तमान साहीवाल) ज़िला
खोज: 1921 ई. — दयाराम साहनी
स्थिति: रावी नदी के तट पर
विशेषता: स्टुअर्ट पिगॉट ने हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो को जुड़वाँ सभ्यताएँ कहा है।
प्रकृति: हड़प्पा एक उन्नत औद्योगिक नगर था।
उद्योग: ऊन, सूती वस्त्र तथा मिट्टी के बर्तन बनाने का उद्योग प्रसिद्ध था।
महत्त्व: पाकिस्तान का राष्ट्रीय राजमार्ग (N-5) हड़प्पा से होकर गुजरता है
धोलावीरा →
खडीर द्वीप पर, लूणी नदी के किनारे (गुजरात)
खोज — जे. पी. जोशी (1967), बी. बी. लाल (1990)
UNESCO World Heritage Site — 2021
नगर तीन भागों में विभाजित
खेल का मैदान (स्टेडियम) प्राप्त हुआ है
मोहनजोदड़ो
अर्थ: मृतकों का टीला
स्थान: सिंधु नदी के तट पर, पाकिस्तान के लरकाना ज़िले में
खोज: 1922 ई. — राखालदास बनर्जी
प्रमुख अवशेष:
विशाल स्नानागार
अन्नागार
कांस्य की नर्तकी की मूर्ति
पशुपति की मुहर
लोथल →
भोगवा नदी के किनारे स्थित (गुजरात)
खोज — रंगनाथ राव (1955)
गोदीबाड़ा, स्टॉकयार्ड
सुव्यवस्थित नगर योजना
सुरकोटड़ा →
सरस्वती नदी के किनारे, कच्छ (गुजरात)
खोज — जे. पी. जोशी (1960)
घोड़े की अस्थियाँ प्राप्त हुई हैं
कालीबंगा →
प्रारम्भिक अग्नि-पूजा के प्रमाण
घग्गर नदी के किनारे, राजस्थान
उत्खनन — अमलानंद घोष (1953–1960)
जुताई किए खेत के प्रमाण
अग्नि वेदिकाएँ
समाधियों की तीन विधियाँ
कच्ची तथा पक्की ईंटें
हड़प्पा सभ्यता का नगर नियोजन
- सिन्धु घाटी सभ्यता की सर्वप्रमुख विशेषता उसकी नगर-योजना तथा जल-निकासी प्रणाली थी।
- लगभग सभी नगर दो भागों में विभक्त थे:
- पश्चिमी टीला (दुर्ग): यहाँ शासक वर्ग रहता था।
- पूर्वी टीला (नगर/आवास क्षेत्र): यहाँ सामान्य नागरिक रहते थे।
- धौलावीरा नगर तीन टीलों में विभक्त था।
- लोथल + सुरकोटदा के दोनों टीले एक ही रक्षा प्रणाली (boundary wall) से घिरे थे।
- चन्हुदड़ो से कोई रक्षा प्रणाली नहीं मिली है।
- सड़कें प्रायः एक-दूसरे को समकोण (90°) पर काटती थीं।
- घरों के गंदे पानी की निकासी हेतु नालियों का निर्माण पक्की ईंटों से किया गया था।
- प्रत्येक घर में एक आंगन, रसोईघर और स्नानागार होता था। अधिकांश घरों में कुओं के भी साक्ष्य मिले हैं। घरों के दरवाज़े मुख्य सड़क की ओर न खुलकर पीछे की ओर खुलते थे।
- राजनीतिक स्थिति
- हड़प्पा सभ्यता के राजनीतिक संगठन के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती है।
- संभावना: राजनीति में व्यापारी वर्ग की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही होगी।
- शहर के मज़दूर → मध्यमवर्गीय जनसांख्यिक
- सामाजिक स्थिति
- संभावना: समाज मातृसत्तात्मक रहा होगा।
- (मातृदेवी की मुख्य पूजा)
- सूती व ऊनी वस्त्रों का प्रयोग करते थे।
- साफ़-सफ़ाई पर ध्यान देते थे। ग़मछा प्रचलित था।
- शाकाहारी व मांसाहारी दोनों थे।
- धातु विज्ञान, मापतौल, मौसम विज्ञान की जानकारी थी।
- अंतर्गत
- a) पूर्ण सामाजिककरण
- b) नगरीय सामाजिककरण
- c) ढांचा-सरकार
- मनोरंजन के लिए चौपड़ तथा पासा खेलते थे। आर्थिक स्थिति
- सिंधु सभ्यता की उन्नति का प्रमुख कारण उन्नत कृषि तथा व्यापार-वाणिज्य था।
- उनका व्यापार मिश्र तथा मेसोपोटामिया के साथ था।
- प्रमुख बंदरगाह → लोथल, रंगपुर, सुरकोटड़ा।
- माप-तौल की इकाई 16 के गुणक में थी (दशमलव प्रणाली)।
- सबसे पहले कपास उगाने का श्रेय सिंधु वासियों को दिया जाता है (सिंध)।
- प्रमुख खाद्यान्न गेहूँ और जौ थे।
- लोथल व रंगपुर से चावल के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
- कृषि कार्य हेतु पत्थर तथा कांसे के औजारों का प्रयोग करते थे।
- बैल वाला हल सबसे लोकप्रिय यंत्र था।
- व्यापार वस्तु विनिमय प्रणाली पर आधारित था।
- लाजवर्द का व्यापार करते थे (अफगानिस्तान)।
- मेसोपोटामिया (ईराक) के लोगों ने इन्हें मेलुहा शब्द से संबोधित किया है।
- चोरी से परिचित थे।
- मूर्ति निर्माण → मोम सांचा विधि।
- बैलगाड़ी का प्रयोग करते थे।
- धार्मिक स्थिति
- ईश्वर की पूजा मानव, वृक्ष तथा पशु तीनों रूपों में करते थे, अर्थात् प्रकृति पूजक थे।
- जादू-टोना, बलि प्रथा पर विश्वास था।
- पुनर्जन्म पर विश्वास था (छात्रावास)।
- अग्निकुंड तथा स्वस्तिक के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
- पशुपति की मुहर प्राप्त हुई है।
- मोहरें
- सभ्यता की सर्वश्रेष्ठ कलाकृतियाँ हैं।
- मुहरें चौकोर, आयताकार, वृत्ताकार, बेलनाकार थीं।
- मुहरों पर सर्वाधिक चित्र एक सींग वाले बैल के हैं।
- मोहनजोदड़ो तथा लोथल से नाव की आकृति की मुहरें प्राप्त हुई हैं।
- लिपि
- लिपि भावचित्रात्मक थी जो दाईं से बाईं ओर लिखी जाती थी। इसे बूस्ट्रोफेडन कहा जाता है।
- 64 मूल चिह्न प्राप्त हुए हैं।
- सिंधु सभ्यता की जानवरों, मुहरों तथा लोहे की मुद्रिकाओं पर इसके नमूने प्राप्त हुए हैं।
- यह लिपि अभी तक पढ़ी नहीं गई है।
- सिंधु सभ्यता का पतन
- i) बाढ़ तथा महामारी → बाह्य आक्रमण
- ii) जंगल कटाई / वनों की कटाई → बाढ़, सूखा
- iii) टेक्टोनिक गतिविधि → जलवायु परिवर्तन
- iv) कृषि → प्राकृतिक आपदा (सूखा, बाढ़ आदि)

